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mahabharat 12.155.4: शालमेले! अवश्य ही कोई कारण होगा जिसके कारण वायुदेव अपने परिवार सहित तुम्हारी रक्षा कर रहे हैं। निःसंदेह यही कारण है कि तुम इस प्रकार खड़े हो।   |   mahabharat अध्याय 12.155: नारदजीका सेमल-वृक्षको उसका अहंकार देखकर फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 155: नारदजीका सेमल-वृक्षको उसका अहंकार देखकर फटकारना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.155.4 
त्वं पुन: कारणैर्नूनं रक्ष्यसे शाल्मले यथा।
वायुना सपरीवारस्तेन तिष्ठस्यसंशयम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
शालमेले! अवश्य ही कोई कारण होगा जिसके कारण वायुदेव अपने परिवार सहित तुम्हारी रक्षा कर रहे हैं। निःसंदेह यही कारण है कि तुम इस प्रकार खड़े हो।
 
Shalmele! There must be some reasons due to which Vayudev is definitely protecting you along with his family. This is undoubtedly the reason why you keep standing like this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)