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mahabharat 12.155.15: तुम्हारी इस प्रकार की बातें करने से मेरा क्रोध भड़क उठा है; इसलिए मैं वायुदेव को तुम्हारे कठोर वचन सुनाऊँगा ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.155: नारदजीका सेमल-वृक्षको उसका अहंकार देखकर फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 155: नारदजीका सेमल-वृक्षको उसका अहंकार देखकर फटकारना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.155.15 
मम रोष: समुत्पन्नस्त्वय्येवं सम्प्रभाषति।
ब्रवीम्येष स्वयं वायोस्तव दुर्भाषितं बहु॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी इस प्रकार की बातें करने से मेरा क्रोध भड़क उठा है; इसलिए मैं वायुदेव को तुम्हारे कठोर वचन सुनाऊँगा ॥15॥
 
Your talking in this manner has aroused my anger; therefore, I will narrate your harsh words to Vayu himself. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)