श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 154: नारदजीका सेमल-वृक्षसे प्रशंसापूर्वक प्रश्न  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.154.17 
इदं च रमणीयं ते प्रतिभाति वनस्पते।
यदिमे विहगास्तात रमन्ते मुदितास्त्वयि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय पौधे! तुम्हारे निकट यह बड़ा सुन्दर दृश्य है कि ये पक्षी तुम्हारी शाखाओं पर आनन्दपूर्वक विहार कर रहे हैं॥17॥
 
‘Dear plant! It is a very beautiful sight near you that these birds are enjoying themselves happily on your branches.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)