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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 154: नारदजीका सेमल-वृक्षसे प्रशंसापूर्वक प्रश्न
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श्लोक 15
श्लोक
12.154.15
शोषयत्येव पातालं वहन् गन्धवह: शुचि:।
सरांसि सरितश्चैव सागरांश्च तथैव च॥ १५॥
अनुवाद
‘सुगंधयुक्त पवित्र वायु पाताल, सरोवर, नदी और समुद्र को भी सुखा सकती है।॥15॥
‘The sacred wind carrying fragrance can dry up even the netherworld, lakes, rivers and oceans.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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