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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 154: नारदजीका सेमल-वृक्षसे प्रशंसापूर्वक प्रश्न
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श्लोक 14
श्लोक
12.154.14
भगवान् पवन: स्थानाद् वृक्षानुच्चावचानपि।
पर्वतानां च शिखराण्याचालयति वेगवान्॥ १४॥
अनुवाद
भगवान वायु इतने शक्तिशाली हैं कि वे न केवल बड़े-छोटे वृक्षों को, अपितु पर्वतों की चोटियों को भी उनके स्थान से हिला देते हैं॥14॥
‘Lord Vayu is so powerful that not only big and small trees but he even shakes the peaks of mountains from their places.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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