श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 153: मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मण बालकके जीवित होनेकी कथा; उसमें गीध और सियारकी बुद्धिमत्ता  »  श्लोक 88-89h
 
 
श्लोक  12.153.88-89h 
सुखस्यानन्तरं दु:खं दु:खस्यानन्तरं सुखम्॥ ८८॥
सुखदु:खावृते लोके नेहास्त्येकमनन्तरम्।
 
 
अनुवाद
सुख के बाद दुःख आता है और दुःख के बाद सुख आता है। सुख-दुःख से घिरे इस संसार में मनुष्य निरन्तर (सुख या दुःख में) अकेला नहीं रहता। 88 1/2॥
 
After happiness comes sorrow and after sorrow comes happiness. In this world surrounded by happiness and sorrow, one does not remain alone continuously (in happiness or sorrow). 88 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)