श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 153: मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मण बालकके जीवित होनेकी कथा; उसमें गीध और सियारकी बुद्धिमत्ता  »  श्लोक 82-83h
 
 
श्लोक  12.153.82-83h 
यो न पश्यति चक्षुर्भ्यां नेङ्गते च कथञ्चन॥ ८२॥
तस्य निष्ठावसानान्ते रुदन्त: किं करिष्यथ।
 
 
अनुवाद
जो न तो आँखों से देखता है और न ही शरीर से कुछ हिलता-डुलता है, उसके जीवन का अन्त होने पर तुम रो कर क्या करोगे? 82 1/2
 
He who neither sees with his eyes nor makes any move with his body, what will you do by crying when his life comes to an end? 82 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)