श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 153: मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मण बालकके जीवित होनेकी कथा; उसमें गीध और सियारकी बुद्धिमत्ता  »  श्लोक 80-81h
 
 
श्लोक  12.153.80-81h 
धर्मं सत्यं श्रुतं न्याय्यं महतीं प्राणिनां दयाम्॥ ८०॥
अजिह्मत्वमशाठॺं च यत्नत: परिमार्गत।
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग धर्म, सत्य, शास्त्रज्ञान, उचित आचरण, समस्त प्राणियों पर महान दया, कुटिलता का अभाव और हठ का त्याग - इन सद्गुणों का यत्नपूर्वक पालन करो ॥80 1/2॥
 
All of you, follow these virtues diligently - religion, truth, knowledge of scriptures, fair behavior, great mercy towards all living beings, absence of crookedness and renunciation of stubbornness. 80 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)