श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 153: मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मण बालकके जीवित होनेकी कथा; उसमें गीध और सियारकी बुद्धिमत्ता  »  श्लोक 121-122
 
 
श्लोक  12.153.121-122 
एषा बुद्धि: समस्तानां चातुर्वर्ण्ये निदर्शिता॥ १२१॥
धर्मार्थमोक्षसंयुक्तमितिहासमिमं शुभम्।
श्रुत्वा मनुष्य: सततमिहामुत्र च मोदते॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
यह ज्ञान चारों वर्णों में उत्पन्न सभी मनुष्यों को बताया गया है। धर्म, अर्थ और मोक्ष से युक्त इस शुभ इतिहास को सदैव सुनने से मनुष्य इस लोक और परलोक में सुख का अनुभव करता है। ॥121-122॥
 
This wisdom is shown to all people born in the four castes. By always listening to this auspicious history containing Dharma, Artha and Moksha, a man experiences happiness in this world and the next. ॥121-122॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि गृध्रगोमायुसंवादे कुमारसंजीवने त्रिपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें गीदड़-गोमायुका संवाद एवं मरे हुए बालकका पुनर्जीवनविषयक एक सौ तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल १२३ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)