श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 153: मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मण बालकके जीवित होनेकी कथा; उसमें गीध और सियारकी बुद्धिमत्ता  »  श्लोक 117-118
 
 
श्लोक  12.153.117-118 
पश्य दैवस्य संयोगं बान्धवानां च निश्चयम्॥ ११७॥
कृपणानां तु रुदतां कृतमश्रुप्रमार्जनम्।
पश्य चाल्पेन कालेन निश्चयान्वेषणेन च॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
देखो, भाग्य का संयोग और उन मित्रों तथा सम्बन्धियों का दृढ़ निश्चय; जिसके कारण दीनतापूर्वक रो रहे उन लोगों के आँसू कुछ ही समय में पोंछ दिए गए। यह उनके दृढ़ अनुसंधान और प्रयास का ही परिणाम है। 117-118।
 
See, the coincidence of destiny and the firm determination of those friends and relatives; due to which the tears of those people who were crying humbly were wiped away in a short time. This is the result of their determined research and efforts. 117-118.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)