श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 153: मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मण बालकके जीवित होनेकी कथा; उसमें गीध और सियारकी बुद्धिमत्ता  »  श्लोक 112-113h
 
 
श्लोक  12.153.112-113h 
ते प्रत्यूचुरिदं वाक्यं दु:खिता: प्रणता: स्थिता:।
एकपुत्रविहीनानां सर्वेषां जीवितार्थिनाम्॥ ११२॥
पुत्रस्य नो जीवदानाज्जीवितं दातुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
तब वह दुःखी व्यक्ति प्रभु को प्रणाम करके उठ खड़ा हुआ और बोला, 'प्रभु! इस इकलौते पुत्र से वंचित होकर हम लोग मृत समान हो रहे हैं। कृपया हमारे इस पुत्र को जीवित करके हम सब जरूरतमंदों को जीवन प्रदान करें।'॥112 1/2॥
 
Then the distressed person stood up after bowing to the Lord and said, 'Prabhu! Being deprived of this only son, we are becoming like dead. Kindly give life to all of us who are in need of life by bringing this son of ours back to life.'॥ 112 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)