श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 153: मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मण बालकके जीवित होनेकी कथा; उसमें गीध और सियारकी बुद्धिमत्ता  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  12.153.106 
भीष्म उवाच
गृध्रोऽस्तमित्याह गतो गतो नेति च जम्बुक:।
मृतस्य तं परिजनमूचतुस्तौ क्षुधान्वितौ॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! गिद्ध और सियार दोनों भूखे थे और अपने उद्देश्य की सिद्धि के लिए मृतक के परिजनों से बातें कर रहे थे। गिद्ध ने कहा कि सूर्य अस्त हो गया है और सियार ने कहा कि नहीं।
 
Bhishmaji says - King! Both the vulture and the jackal were hungry and were talking to the relatives of the deceased to achieve their purpose. The vulture said that the sun had set and the jackal said no.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)