Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.151.21: आपको यह सुनिश्चित करने का भरसक प्रयास करना चाहिए कि मेरे कारण ब्राह्मण सुरक्षित रहें। हे मनुष्यों के स्वामी, मेरे सामने प्रतिज्ञा करें कि मैं फिर कभी ब्राह्मणों के साथ विश्वासघात नहीं करूँगा। | mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा ते मत्कृते क्षेमं लभन्ते ते तथा कुरु।
प्रतिजानीहि चाद्रोहं ब्राह्मणानां नराधिप॥ २१॥
अनुवाद
आपको यह सुनिश्चित करने का भरसक प्रयास करना चाहिए कि मेरे कारण ब्राह्मण सुरक्षित रहें। हे मनुष्यों के स्वामी, मेरे सामने प्रतिज्ञा करें कि मैं फिर कभी ब्राह्मणों के साथ विश्वासघात नहीं करूँगा।
You should try your best to ensure that the Brahmins remain safe because of me. O Lord of men, take a vow in front of me that I will never betray the Brahmins again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥