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mahabharat 12.151.13: आप ब्राह्मणों के बल को जानते हैं, वेदों और शास्त्रों में वर्णित उनकी महिमा को भी जानते हैं; अतः आपको शांतिपूर्वक ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि ब्राह्मण समाज आपको शरण दे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.151.13 
विदितं भवतो वीर्यं माहात्म्यं वेद आगमे।
कुरुष्वेह यथाशान्ति ब्रह्मा शरणमस्तु ते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आप ब्राह्मणों के बल को जानते हैं, वेदों और शास्त्रों में वर्णित उनकी महिमा को भी जानते हैं; अतः आपको शांतिपूर्वक ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि ब्राह्मण समाज आपको शरण दे॥13॥
 
You know the power of the Brahmins. You also know their glory which is found in the Vedas and the scriptures; therefore you should peacefully make such efforts that the Brahmin community may give you shelter.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)