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mahabharat 12.151.10: शौनक बोले - यदि कोई अज्ञानी व्यक्ति गलत काम भी करे तो इसमें आश्चर्य क्या है? अतः इस रहस्य को जानने वाले बुद्धिमान व्यक्ति को जीवों पर क्रोध नहीं करना चाहिए। 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 151: ब्रह्महत्याके अपराधी जनमेजयका इन्द्रोत मुनिकी शरणमें जाना और इन्द्रोत मुनिका उससे ब्राह्मणद्रोह न करनेकी प्रतिज्ञा कराकर उसे शरण देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.151.10 
शौनक उवाच
किमाश्चर्यं यदप्राज्ञो बहु कुर्यादसाम्प्रतम्।
इति वै पण्डितो भूत्वा भूतानां नानुकुप्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
शौनक बोले - यदि कोई अज्ञानी व्यक्ति गलत काम भी करे तो इसमें आश्चर्य क्या है? अतः इस रहस्य को जानने वाले बुद्धिमान व्यक्ति को जीवों पर क्रोध नहीं करना चाहिए। 10॥
 
Shaunaka said – What is surprising if an ignorant person does wrong work? Therefore, an intelligent person who knows this secret should not get angry at living beings. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)