Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.150.8-10: वहाँ जाकर उसने ऋषि के चरण पकड़ लिए और धीरे-धीरे दबाने लगा। राजा को वहाँ देखकर ऋषि ने उसे डाँटा। उन्होंने कहा, "अरे! तुम महापापी और ब्राह्मण-हत्यारे हो। तुम यहाँ कैसे आए? हमसे तुम्हारा क्या लेना-देना? हमें किसी भी प्रकार से स्पर्श मत करो। चले जाओ, हमें तुम्हारा यहाँ रहना अच्छा नहीं लगता।" 8-10 | mahabharat अध्याय 12.150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ जाकर उसने ऋषि के चरण पकड़ लिए और धीरे-धीरे दबाने लगा। राजा को वहाँ देखकर ऋषि ने उसे डाँटा। उन्होंने कहा, "अरे! तुम महापापी और ब्राह्मण-हत्यारे हो। तुम यहाँ कैसे आए? हमसे तुम्हारा क्या लेना-देना? हमें किसी भी प्रकार से स्पर्श मत करो। चले जाओ, हमें तुम्हारा यहाँ रहना अच्छा नहीं लगता।" 8-10
Going there, he caught hold of the sage's feet and started pressing them slowly. The sage, seeing the king there, rebuked him. He said, "Oh! You are a great sinner and a killer of brahmins. How did you come here? What do you have to do with us? Do not touch me in any way. Go away, we do not like your staying here." 8-10
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥