श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.150.2 
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि पुराणमृषिसंस्तुतम्।
इन्द्रोत: शौनको विप्रो यदाह जनमेजयम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'हे राजन! इस विषय में मैं आपको एक प्राचीन कथा और उपदेश सुनाता हूँ, जिसकी ऋषियों ने प्रशंसा की है और जिसे शुनकवंशी ब्राह्मण इन्द्रौत ने राजा जनमेजय को सुनाया था।
 
Bhishma said, 'O King! In this matter I shall narrate to you an ancient story and advice which has been praised by the sages and which was told by the Brahmin Indraut of the Sunak dynasty to King Janamejaya.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas