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mahabharat 12.150.17: इस संसार को छोड़कर तुम अपने पाप कर्मों के फलस्वरूप अनंत वर्षों तक सिर झुकाए हुए नरक में रहोगे॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 12.150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.150.17 
इमं लोकं विमुच्य त्वमवाङ्मूर्द्धा पतिष्यसि।
अशाश्वती: शाश्वतीश्च समा: पापेन कर्मणा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस संसार को छोड़कर तुम अपने पाप कर्मों के फलस्वरूप अनंत वर्षों तक सिर झुकाए हुए नरक में रहोगे॥ 17॥
 
'After leaving this world, you will remain in hell for infinite years with your head bent down as a consequence of your sinful deeds.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)