| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 150: इन्द्रोत मुनिका राजा जनमेजयको फटकारना » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 12.150.11  | रुधिरस्येव ते गन्ध: शवस्येव च दर्शनम्।
अशिव: शिवसंकाशो मृतो जीवन्निवाटसि॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | तुम्हारे मुख से रक्त जैसी दुर्गन्ध आ रही है। तुम्हारा रूप मुर्दे के समान है। तुम शुभ दिखते हो, पर हो अशुभ। वास्तव में तुम मरे हुए हो, पर जीवित मनुष्य की भाँति विचरण कर रहे हो।॥11॥ | | | | ‘You smell like blood. Your appearance is like the appearance of a dead person. You look auspicious but are inauspicious. In reality, you are dead but you are roaming around like a living person.॥ 11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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