Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.15.55: जो स्वयं अत्याचारी बनकर अपने हाथ में शस्त्र लेकर अपने मारने आए अत्याचारी को मार डालता है, वह भ्रूणहत्या का दोषी नहीं होता, क्योंकि उसे मारने आए हुए व्यक्ति का क्रोध उसे मारने वाले के मन में भी क्रोध उत्पन्न कर देता है ॥ 55॥   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.15.55 
आततायी हि यो हन्यादाततायिनमागतम्।
न तेन भ्रूणहा स स्यान्मन्युस्तं मन्युमार्छति॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जो स्वयं अत्याचारी बनकर अपने हाथ में शस्त्र लेकर अपने मारने आए अत्याचारी को मार डालता है, वह भ्रूणहत्या का दोषी नहीं होता, क्योंकि उसे मारने आए हुए व्यक्ति का क्रोध उसे मारने वाले के मन में भी क्रोध उत्पन्न कर देता है ॥ 55॥
 
One who himself becomes a tyrant and kills a tyrant who has come to kill him with a weapon in his hand is not guilty of foeticide because the anger of the person who has come to kill him creates anger in the mind of the one who kills him as well. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)