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mahabharat 12.15.43: समस्त प्रजा दण्ड पर आश्रित है, दण्ड से भय उत्पन्न होता है, ऐसा विद्वानों का मत है। इस संसार और मनुष्यों के स्वर्ग का अस्तित्व दण्ड पर ही आधारित है ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.15.43 
दण्डे स्थिता: प्रजा: सर्वा भयं दण्डे विदुर्बुधा:।
दण्डे स्वर्गो मनुष्याणां लोकोऽयं सुप्रतिष्ठित:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्रजा दण्ड पर आश्रित है, दण्ड से भय उत्पन्न होता है, ऐसा विद्वानों का मत है। इस संसार और मनुष्यों के स्वर्ग का अस्तित्व दण्ड पर ही आधारित है ॥ 43॥
 
The whole population is dependent on the punishment, fear is caused by punishment, this is the belief of learned people. The existence of this world and the heaven of humans is based on the punishment. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)