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mahabharat 12.15.4: दण्ड अन्न और धन की भी रक्षा करता है। ऐसा जानकर तुम भी दण्ड धारण करो और संसार के व्यवहार को देखो।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.15.4 
दण्डेन रक्ष्यते धान्यं धनं दण्डेन रक्ष्यते।
एवं विद्वानुपाधत्स्व भावं पश्यस्व लौकिकम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
दण्ड अन्न और धन की भी रक्षा करता है। ऐसा जानकर तुम भी दण्ड धारण करो और संसार के व्यवहार को देखो।॥4॥
 
The punishment protects the grain and wealth too. Knowing this, you should also wear the punishment and look at the behaviour of the world. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)