Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.15.24: जो मंदबुद्धि क्षत्रिय क्रोध और प्रसन्नता दोनों को खो चुके हैं, वे वन में जाकर तपस्वी हो जाते हैं, परन्तु वे भी हिंसा के बिना जीवित नहीं रह सकते॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 12.15: अर्जुनके द्वारा राजदण्डकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विनीतक्रोधहर्षा हि मन्दा वनमुपाश्रिता:।
विना वधं न कुर्वन्ति तापसा: प्राणयापनम्॥ २४॥
अनुवाद
जो मंदबुद्धि क्षत्रिय क्रोध और प्रसन्नता दोनों को खो चुके हैं, वे वन में जाकर तपस्वी हो जाते हैं, परन्तु वे भी हिंसा के बिना जीवित नहीं रह सकते॥ 24॥
Those dull-witted Kshatriyas who have lost both anger and happiness, go to the forest and become ascetics. But even they cannot survive without violence.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥