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श्लोक 12.149.19  |
न निष्कृतिर्भवेत् तस्य यो हन्याच्छरणागतम्।
इतिहासमिमं श्रुत्वा पुण्यं पापप्रणाशनम्।
न दुर्गतिमवाप्नोति स्वर्गलोकं च गच्छति॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| जो शरणागत को मारता है, वह इस पाप से कभी मुक्त नहीं होता। पापों का नाश करने वाली इस पुण्यमयी कथा को सुनकर मनुष्य कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता। उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है॥19॥ |
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| He who kills a person who has sought refuge never gets rid of this sin. After listening to this virtuous story which destroys sins, a man never falls into misfortune. He attains heaven.॥ 19॥ |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि लुब्धकस्वर्गगमने एकोनपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४९॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें व्याधका स्वर्गलोकमें गमनविषयक एक सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४९॥
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