श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 149: बहेलियेको स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  12.149.10-11h 
स ज्वालै: पवनोद्भूतैर्विस्फुलिङ्गै: समन्तत:॥ १०॥
ददाह तद् वनं घोरं मृगपक्षिसमाकुलम्।
 
 
अनुवाद
हवा से उड़ती हुई चिंगारियों और लपटों के सहारे चारों ओर फैलती हुई वह दावानल पशु-पक्षियों से भरे हुए भयंकर वन को जलाने लगी।
 
Spreading all around with the help of sparks and flames blown by the wind, that forest fire began to burn the fierce forest filled with animals and birds. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)