श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 149: बहेलियेको स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.149.1 
भीष्म उवाच
विमानस्थौ तु तौ राजन् लुब्धक: खे ददर्श ह।
दृष्ट्वा तौ दम्पती राजन् व्यचिन्तयत तां गतिम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - हे राजन! व्याध ने उन दोनों पक्षियों को दिव्य रूप धारण करके विमान पर बैठकर आकाश में उड़ते देखा। उस दिव्य युगल को देखकर व्याध उनके मोक्ष के विषय में सोचने लगा॥1॥
 
Bhishmaji says - O King! The hunter saw those two birds assuming divine form, sitting on a plane and flying through the sky. Seeing that divine couple, the hunter started thinking about their salvation.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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