Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.148.4-5: तुमने मुझे अपने प्रेमपूर्ण, सुखद, मनोहर और मधुर वचनों से सुखी किया है। मैंने तुम्हारे साथ पर्वतों की कन्दराओं में, नदियों के तटों पर, झरनों के आसपास और वृक्षों की सुन्दर चोटियों पर आनन्द लिया है। मैं आकाश में भी तुम्हारे साथ सदैव सुखपूर्वक विचरण करता रहा हूँ।॥ 4-5॥ | mahabharat अध्याय 12.148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुमने मुझे अपने प्रेमपूर्ण, सुखद, मनोहर और मधुर वचनों से सुखी किया है। मैंने तुम्हारे साथ पर्वतों की कन्दराओं में, नदियों के तटों पर, झरनों के आसपास और वृक्षों की सुन्दर चोटियों पर आनन्द लिया है। मैं आकाश में भी तुम्हारे साथ सदैव सुखपूर्वक विचरण करता रहा हूँ।॥ 4-5॥
‘You have made me happy with your loving, pleasant, charming and sweet words. I have enjoyed with you in the caves of the mountains, on the banks of the rivers, around the waterfalls and on the beautiful tops of the trees. I have always roamed happily with you even in the sky.॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥