श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.148.3 
शोच्या भवति बन्धूनां पतिहीना तपस्विनी।
लालिताहं त्वया नित्यं बहुमानाच्च पूजिता॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पतिहीन स्त्री अपने भाइयों और सम्बन्धियों के लिए दुःख का कारण बनती है। तुमने मुझे सदैव लाड़-प्यार से पाला है और बड़े आदर से रखा है॥3॥
 
‘A woman without a husband becomes a cause of sorrow for her brothers and relatives. You have always pampered me and kept me with great respect.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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