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mahabharat 12.148.11-12h: वह विचित्र हार और वस्त्र पहने हुए था और नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित था। पुण्यात्मा पुरुषों से युक्त करोड़ों विमान उसके चारों ओर थे।   |   mahabharat अध्याय 12.148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 148: कबूतरीका विलाप और अग्निमें प्रवेश तथा उन दोनोंको स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  12.148.11-12h 
चित्रमाल्याम्बरधरं सर्वाभरणभूषितम्॥ ११॥
विमानशतकोटीभिरावृतं पुण्यकर्मभि:।
 
 
अनुवाद
वह विचित्र हार और वस्त्र पहने हुए था और नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित था। पुण्यात्मा पुरुषों से युक्त करोड़ों विमान उसके चारों ओर थे।
 
He wore strange necklaces and clothes and was decked with all kinds of ornaments. Billions of aircrafts containing virtuous men surrounded him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)