Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.147.8-9: ओह! उस महान कबूतर ने अपना शरीर दान करके मेरे सामने आतिथ्य का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत किया है, अतः मैं भी धर्म के मार्ग पर चलूँगा; क्योंकि धर्म ही परम मोक्ष है। मैं भी वही धर्म चाहता हूँ जो मैंने उस महान पक्षी में देखा था।' | mahabharat अध्याय 12.147: बहेलियेका वैराग्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहो देहप्रदानेन दर्शितातिथिपूजना॥ ८॥
तस्माद् धर्मं चरिष्यामि धर्मो हि परमा गति:।
दृष्टो धर्मो हि धर्मिष्ठे यादृशो विहगोत्तमे॥ ९॥
अनुवाद
ओह! उस महान कबूतर ने अपना शरीर दान करके मेरे सामने आतिथ्य का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत किया है, अतः मैं भी धर्म के मार्ग पर चलूँगा; क्योंकि धर्म ही परम मोक्ष है। मैं भी वही धर्म चाहता हूँ जो मैंने उस महान पक्षी में देखा था।'
‘Oh! The great pigeon has set a bright example of hospitality in front of me by donating his body, so I will also follow the path of Dharma; because Dharma is the ultimate salvation. I also want the same Dharma that I saw in that great bird. 8-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥