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mahabharat 12.147.5-6h: अब मैं पाप से विमुख हो जाऊँगा और अपनी पत्नी, पुत्र और यहाँ तक कि अपने प्रिय प्राणों को भी त्याग दूँगा। उस विशाल कबूतर ने मुझे शुद्ध धर्म सिखाया है।   |   mahabharat अध्याय 12.147: बहेलियेका वैराग्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 147: बहेलियेका वैराग्य  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  12.147.5-6h 
सोऽहं त्यक्ष्ये प्रियान् प्राणान् पुत्रान् दारांस्तथैव च॥ ५॥
उपदिष्टो हि मे धर्म: कपोतेन महात्मना।
 
 
अनुवाद
अब मैं पाप से विमुख हो जाऊँगा और अपनी पत्नी, पुत्र और यहाँ तक कि अपने प्रिय प्राणों को भी त्याग दूँगा। उस विशाल कबूतर ने मुझे शुद्ध धर्म सिखाया है।
 
‘Now I will turn away from sin and abandon my wife, son and even my beloved life. The great pigeon has taught me the pure religion. 5 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)