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mahabharat 12.146.2: पक्षियों को मारकर जीविका चलाने वाले उस शिकारी को देखकर उस पक्षी ने बड़ी सावधानी से शास्त्र विधिपूर्वक उसकी पूजा की ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.146.2 
तं वै शाकुनिकं दृष्ट्वा विधिदृष्टेन कर्मणा।
स पक्षी पूजयामास यत्नात् तं पक्षिजीविनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
पक्षियों को मारकर जीविका चलाने वाले उस शिकारी को देखकर उस पक्षी ने बड़ी सावधानी से शास्त्र विधिपूर्वक उसकी पूजा की ॥2॥
 
Looking at the hunter who earned his living by killing birds, that bird worshipped him with great care, in accordance with the scriptures. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)