न सा स्त्री ह्यभिमन्तव्या यस्यां भर्ता न तुष्यति।
तुष्टे भर्तरि नारीणां तुष्टा: स्यु: सर्वदेवता:॥ ३॥
अनुवाद
जिस स्त्री का पति उससे संतुष्ट न हो, उसे स्त्री ही नहीं समझना चाहिए। पति के संतुष्ट होने पर सभी देवता उस स्त्री से संतुष्ट रहते हैं। ॥3॥
A woman whose husband is not satisfied with her should not be considered a woman at all. When the husband is satisfied, all the gods remain satisfied with the woman. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥