श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.143.1 
युधिष्ठिर उवाच
पितामह महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारद।
शरणं पालयानस्य यो धर्मस्तं वदस्व मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- परम बुद्धिमान पितामह! आप समस्त शास्त्रों के ज्ञाता हैं; अतः यह बताइए कि शरणागत की रक्षा करने वाले प्राणी को कौन-सा धर्म प्राप्त होता है?॥1॥
 
Yudhishthir asked – Most wise grandfather! You are an expert in all the scriptures; Therefore, tell me, which religion is attained by the creature who protects the surrendered person? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)