Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.142.38: ब्राह्मणों के प्रसन्न होने से महान यश की प्राप्ति होती है। उनके अप्रसन्न होने से महान भय उत्पन्न होता है। जब ब्राह्मण प्रसन्न होते हैं, तब वे अमृत के समान जीवनदायी होते हैं और जब वे क्रोधित होते हैं, तब वे विष के समान भयंकर हो जाते हैं ॥38॥ | mahabharat अध्याय 12.142: आपात्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणों के प्रसन्न होने से महान यश की प्राप्ति होती है। उनके अप्रसन्न होने से महान भय उत्पन्न होता है। जब ब्राह्मण प्रसन्न होते हैं, तब वे अमृत के समान जीवनदायी होते हैं और जब वे क्रोधित होते हैं, तब वे विष के समान भयंकर हो जाते हैं ॥38॥
The happiness of Brahmins leads to great fame. Their displeasure leads to great fear. When Brahmins are happy, they are life-giving like nectar and when they are angry, they become as dreadful as poison. ॥38॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि द्विचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें एक सौ बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥