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mahabharat 12.142.26: बकरा, घोड़ा और क्षत्रिय - ये तीनों ब्रह्माजी ने एक ही बनाए हैं। इनके द्वारा ही समस्त प्राणियों की जीवन यात्रा बार-बार सम्पन्न होती है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.142.26 
अजोऽश्व: क्षत्रमित्येतत् सदृशं ब्रह्मणा कृतम्।
तस्मादभीक्ष्णं भूतानां यात्रा काचित् प्रसिद्धॺति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
बकरा, घोड़ा और क्षत्रिय - ये तीनों ब्रह्माजी ने एक ही बनाए हैं। इनके द्वारा ही समस्त प्राणियों की जीवन यात्रा बार-बार सम्पन्न होती है॥ 26॥
 
Goat, horse and Kshatriya - these three have been made the same by Brahmaji. Through them, the life journey of all creatures is repeatedly accomplished.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)