ज्ञानमप्यपदिश्यं हि यथा नास्ति तथैव तत्।
तं तथा छिन्नमूलेन सन्नोदयितुमर्हसि॥ २३॥
अनुवाद
जो ज्ञान संदिग्ध है, उसका होना और न होना एक ही है; इसलिए तू उस संदेह को जड़ से उखाड़कर दूर कर दे (निःसंदेह ज्ञान का आश्रय ले)॥23॥
The knowledge which is doubtful, its existence and non-existence are the same; therefore you should uproot that doubt and remove it away (take shelter of doubtless knowledge)॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥