Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.142.21: वेद और शास्त्र जो कुछ कहते हैं और तर्क से समर्थित होते हैं, वही शास्त्रों की प्रशंसा है, अर्थात् शास्त्रों की वही बात लोगों के मन में बैठ जाती है। दूसरे लोग अज्ञात विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए तर्क को ही सर्वोत्तम उपाय समझते हैं, परन्तु यह उनकी मूर्खता है।॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.142: आपात्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वेद और शास्त्र जो कुछ कहते हैं और तर्क से समर्थित होते हैं, वही शास्त्रों की प्रशंसा है, अर्थात् शास्त्रों की वही बात लोगों के मन में बैठ जाती है। दूसरे लोग अज्ञात विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए तर्क को ही सर्वोत्तम उपाय समझते हैं, परन्तु यह उनकी मूर्खता है।॥21॥
Whatever is said by the Vedas and scriptures, and which is supported by logic, is what praises the scriptures, i.e., only that thing of the scriptures gets stuck in people's minds. Other people consider only logic to be the best way to gain knowledge of unknown subjects, but this is their foolishness. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥