श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.142.19 
लोकयात्रामिहैके तु धर्मं प्राहुर्मनीषिण:।
समुद्दिष्टं सतां धर्मं स्वयमूहेत पण्डित:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में कुछ बुद्धिमान पुरुष विद्वानों द्वारा अपनाए गए आचार को ही धर्म कहते हैं, परंतु विद्वानों को स्वयं ही सत्पुरुषों के शास्त्रविहित धर्म का विचार करके उसका निर्णय करना चाहिए ॥19॥
 
In this world, some wise men call the ethics followed by learned men as religion, but learned men themselves should think about and decide on the religion prescribed by the scriptures of good men. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)