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mahabharat 12.141.95: ऐसा विचार कर ऋषि ने वैदिक रीति से अग्नि की स्थापना की तथा स्वयं इंद्र और अग्निदेवता के लिए भोजन पकाया।   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  12.141.95 
ततोऽग्निमुपसंहृत्य ब्राह्मेण विधिना मुनि:।
ऐन्द्राग्नेयेन विधिना चरुं श्रपयत स्वयम्॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा विचार कर ऋषि ने वैदिक रीति से अग्नि की स्थापना की तथा स्वयं इंद्र और अग्निदेवता के लिए भोजन पकाया।
 
Thinking so, the sage established fire according to Vedic rituals and himself cooked the food for the purpose of Indra and the Agnidevata.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)