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mahabharat 12.141.92: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! ऐसा कहकर चाण्डाल ने ऋषि को रोकने का अपना काम छोड़ दिया। विश्वामित्र उसे ले जाने का निश्चय कर चुके थे, इसलिए उन्होंने कुत्ते की जाँघ ले ली।   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  12.141.92 
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा निववृते मातङ्ग: कौशिकं तदा।
विश्वामित्रो जहारैव कृतबुद्धि: श्वजाघनीम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! ऐसा कहकर चाण्डाल ने ऋषि को रोकने का अपना काम छोड़ दिया। विश्वामित्र उसे ले जाने का निश्चय कर चुके थे, इसलिए उन्होंने कुत्ते की जाँघ ले ली।
 
Bhishma says - Yudhishthira! Having said this, the Chandala left his work of stopping the sage. Vishwamitra had already decided to take him; hence he took the dog's thigh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)