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mahabharat 12.141.83: चाण्डाल ने कहा, "ब्राह्मण! मैं तुम्हारा हितैषी मित्र होने के नाते ही तुम्हें यह धर्माचरण का उपदेश दे रहा हूँ; क्योंकि मुझे तुम पर दया आ रही है। मैं जो कल्याणकारी बात कह रहा हूँ, उसे कृपया स्वीकार करो। लोभ के कारण पाप मत करो।"   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.83 
श्वपच उवाच
सुहृद् भूत्वानुशासे त्वां कृपा हि त्वयि मे द्विज।
यदिदं श्रेय आधत्स्व मा लोभात् पातकं कृथा:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
चाण्डाल ने कहा, "ब्राह्मण! मैं तुम्हारा हितैषी मित्र होने के नाते ही तुम्हें यह धर्माचरण का उपदेश दे रहा हूँ; क्योंकि मुझे तुम पर दया आ रही है। मैं जो कल्याणकारी बात कह रहा हूँ, उसे कृपया स्वीकार करो। लोभ के कारण पाप मत करो।"
 
The Chandala said, "Brahmin! I am giving you this advice of religious conduct only as your well-wisher friend; because I feel pity for you. Please accept the welfare that I am telling you. Do not commit sins out of greed."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)