श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  12.141.78 
श्वपच उवाच
कामं नरा जीवितं संत्यजन्ति
न चाभक्ष्ये क्वचित् कुर्वन्ति बुद्धिम्।
सर्वान् कामान् प्राप्नुवन्तीह विद्वन्
प्रियस्व कामं सहित: क्षुधैव॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
चाण्डाल ने कहा, 'विद्वान! भले ही सज्जन लोग प्राण त्याग दें, परन्तु मांसाहार का विचार भी नहीं करते। इसी से उनकी समस्त कामनाएँ पूर्ण होती हैं; अतः तुम भी भूख सहित उपवास करके अपनी कामनाएँ पूर्ण करो।'
 
The Chandala said, 'Learned one! Good men may even give up their lives, but they never think of eating non-vegetarian food. This is how they achieve all their desires; hence you too should fulfill your desires by fasting along with hunger. 78.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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