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श्लोक 12.141.78  |
श्वपच उवाच
कामं नरा जीवितं संत्यजन्ति
न चाभक्ष्ये क्वचित् कुर्वन्ति बुद्धिम्।
सर्वान् कामान् प्राप्नुवन्तीह विद्वन्
प्रियस्व कामं सहित: क्षुधैव॥ ७८॥ |
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| अनुवाद |
| चाण्डाल ने कहा, 'विद्वान! भले ही सज्जन लोग प्राण त्याग दें, परन्तु मांसाहार का विचार भी नहीं करते। इसी से उनकी समस्त कामनाएँ पूर्ण होती हैं; अतः तुम भी भूख सहित उपवास करके अपनी कामनाएँ पूर्ण करो।' |
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| The Chandala said, 'Learned one! Good men may even give up their lives, but they never think of eating non-vegetarian food. This is how they achieve all their desires; hence you too should fulfill your desires by fasting along with hunger. 78. |
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