Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.141.75: विश्वामित्र बोले, "कोई भी महामुनि ऐसा कोई कर्म नहीं कर सकता जो पापपूर्ण हो या जिसकी निंदा की गई हो। मेरे विचार में कुत्ता और हिरण दोनों समान हैं, क्योंकि वे पशु हैं। इसलिए मैं इस कुत्ते की जांघ अवश्य खाऊँगा।" 75. | mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्वामित्र उवाच
न पातकं नावमतमृषि: सन् कर्तुमर्हति।
समौै च श्वमृगौ मन्ये तस्माद् भोक्ष्ये श्वजाघनीम्॥ ७५॥
अनुवाद
विश्वामित्र बोले, "कोई भी महामुनि ऐसा कोई कर्म नहीं कर सकता जो पापपूर्ण हो या जिसकी निंदा की गई हो। मेरे विचार में कुत्ता और हिरण दोनों समान हैं, क्योंकि वे पशु हैं। इसलिए मैं इस कुत्ते की जांघ अवश्य खाऊँगा।" 75.
Vishwamitra said, "No great sage can do any deed which is sinful or which is condemned. Dog and deer are both equal in my opinion because they are animals. Therefore, I will definitely eat this dog's thigh." 75.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥