Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.141.68: चाण्डाल ने कहा, "मुनि! इसे खाने से कोई भी दीर्घायु नहीं हो सकता। न तो यह जीवन शक्ति देता है और न ही अमृत के समान तृप्ति देता है; अतः आप कोई अन्य भिक्षा मांग लें। आपको कुत्ते का मांस खाने की इच्छा नहीं होनी चाहिए। कुत्ता ब्राह्मणों के लिए अभक्ष्य है।" | mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्वपच उवाच
नैतत् खादन् प्राप्नुते दीर्घमायु-
र्नैव प्राणान्नामृतस्येव तृप्ति:।
भिक्षामन्यां भिक्ष मा ते मनोऽस्तु
श्वभक्षणे श्वा ह्यभक्ष्यो द्विजानाम्॥ ६८॥
अनुवाद
चाण्डाल ने कहा, "मुनि! इसे खाने से कोई भी दीर्घायु नहीं हो सकता। न तो यह जीवन शक्ति देता है और न ही अमृत के समान तृप्ति देता है; अतः आप कोई अन्य भिक्षा मांग लें। आपको कुत्ते का मांस खाने की इच्छा नहीं होनी चाहिए। कुत्ता ब्राह्मणों के लिए अभक्ष्य है।"
The Chandala said, "Muni! No one can live long by eating this. Neither does it give life force nor does it satisfy like nectar; therefore, you should ask for some other alms. You should not feel like eating dog meat. Dog is inedible for Brahmins. 68.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥