श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  12.141.50 
विश्वामित्रस्तु मातङ्गमुवाच परिसान्त्वयन्।
क्षुधितोऽहं गतप्राणो हरिष्यामि श्वजाघनीम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र ने चाण्डाल को सांत्वना देते हुए कहा, "भाई! मुझे बहुत भूख लगी है। मैं मर रहा हूँ; इसलिए मैं इस कुत्ते की जांघ ले लूँगा।"
 
Vishwamitra consoled the Chandala and said, "Brother! I am very hungry. I am dying; therefore I will take this dog's thigh." 50
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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