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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.141.48 
चाण्डालस्तद् वच: श्रुत्वा महर्षेर्भावितात्मन:।
शयनादुपसम्भ्रान्त उद्ययौ प्रति तं तत:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध हृदय वाले उस मुनि के ये वचन सुनकर चाण्डाल भयभीत हो गया और शय्या से उठकर उसके पास गया। 48।
 
On hearing these words of that sage with a pure heart, the Chandala got frightened and got up from his bed and went to her. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)