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mahabharat 12.141.36: हे राजनश्रेष्ठ! अब मुनि विचार करने लगे कि मेरा कल्याण कैसे होगा? ऐसा क्या किया जाए कि मैं भोजन के बिना व्यर्थ मृत्यु को प्राप्त न होऊँ?॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.36 
स चिन्तयामास मुनि: किं नु मे सुकृतं भवेत्।
कथं वृथा न मृत्यु: स्यादिति पार्थिवसत्तम॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! अब मुनि विचार करने लगे कि मेरा कल्याण कैसे होगा? ऐसा क्या किया जाए कि मैं भोजन के बिना व्यर्थ मृत्यु को प्राप्त न होऊँ?॥ 36॥
 
O best of kings! Now the sage began to think, how will I be benefited? What should be done so that I do not die a useless death without food?॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)