श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.141.31 
कुक्कुटारावबहुलं गर्दभध्वनिनादितम्।
उद्घोषद्भि: खरैर्वाक्यै: कलहद्भि: परस्परम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस महल में सर्वत्र मुर्गों की बांग की ध्वनि गूँज रही थी। गधों के रेंकने की ध्वनि भी गूँज रही थी। वे चाण्डाल आपस में झगड़ रहे थे, एक-दूसरे को कठोर शब्दों में कोस रहे थे और उत्पात मचा रहे थे।
 
The sound of the roosters' crows was resonating everywhere in that palace. The sound of the donkeys braying was also resonating. Those Chandalas were quarreling among themselves and cursing each other with harsh words and creating a ruckus.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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