श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.141.27 
त्यक्त्वा दारांश्च पुत्रांश्च कस्मिंश्च जनसंसदि।
भक्ष्याभक्ष्यसमो भूत्वा निरग्निरनिकेतन:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वह अपनी स्त्री और पुत्रों को प्रजा के बीच छोड़कर अग्निहोत्र और आश्रम का त्याग करके भक्ष्य और अभक्ष्य वस्तुओं को एक समान मानता हुआ विचरण करने लगा॥27॥
 
He left his wife and sons among the people and abandoning the fire-hotra and the ashram, he started wandering, treating edible and inedible things in the same way.॥27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas